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कंपनी में नौकरी का झांसा देकर करते थे ठगी, पुलिस ने गिरोह का किया पर्दाफाश

गाजियाबाद बड़े सरकारी विभागों, कंपनियों और नामी प्राइवेट कंपनियों से सीनियर पदों से रिटायर्ड होने वालों को देश और विदेश की कंपनी में ऊंची पोस्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर सेल और साहिबाबाद पुलिस की टीम ने इस गिरोह के 2 बदमाशों को आगरा से गिरफ्तार किया है। आरोपितों से अभी तक तीन बैंक अकाउंट की जानकारी मिली है। इनमें डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन का पता चला है। मामले की जांच की जा रही सीओ साइबर सेल अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि गिरोह ने कुछ दिन पहले साहिबाबाद थाना क्षेत्र में रहने वाले एक शख्स से 38 लाख रुपये ठगे थे। इस मामले में सोनवीर और अजीत को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही गैंग के 2 अन्य सदस्य श्याम सुंदर और उसकी पत्नी सोनिया 10 लाख रुपये की ठगी के एक अन्य मामले में गौतमबुद्धनगर जेल में बंद है। मामले की जांच की जा रही है। पूरा गैंग एक ही परिवार चला रहा था। गैंग में श्याम सुंदर उसकी पत्नी सोनिया, उसका भाई सोनवीर और उसका साल अजीत शामिल है। क्या है मामला साहिबाबाद एरिया में रहने वाले सुरेश चंद मई 2020 में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के पद से रिटायर्ड हुए थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने काम करने के लिए कुछ जॉब पोर्टल पर अपनी डिटेल डाली थी। आरोपितों ने अगस्त 2020 में इनसे संपर्क किया और बड़े पैकेज पर टाटा पावर में डायरेक्टर की पोस्ट पर जॉब ऑफर की। सुरेश ऊंची पोस्ट, बड़ी कंपनी और अच्छी सैलरी के चक्कर में वह जालसाजों के झांसे में आ गए। इसके बाद ठगों ने उनसे प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन और फाइल चार्ज के नाम पर रुपये लेना शुरू किया। यह सभी रुपये जॉइनिंग के बाद लौटाने की बात की गई। इस वजह से वह झांसे में आते गए और कई बार में उन्होंने तीन खातों में 38 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी जब उनकी जॉब नहीं लगी तो उन्हें ठगी का पता चला। असलियत समझने के बाद फरवरी 2021 में उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस में की। रिटायर्ड अधिकारी टारगेट पर पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उनके टारगेट पर ज्यादातर सरकारी और प्राइवेट कंपनियों से रिटायर होने वाले अधिकारी और कर्मचारी होते हैं। वह विभिन्न वेबसाइट से इस प्रकार के डेटा इकट्ठा कर उन्हें कॉल करते हैं और रिटायरमेंट के बाद बड़ी कंपनी में अच्छी पोस्ट का झांसा देते हैं। इसके बाद वह प्रोसेसिंग फीस व अन्य मदों में रुपये ट्रांसफर कराते हैं, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद इस प्रकार के कर्मचारियों के अकाउंट में पीएफ व अन्य रुपये अच्छे खासे होते हैं। ऐसे में वे जल्दी उनके झांसे में आ जाते हैं और रकम ट्रांसफर कर देते हैं। आरोपितों ने बताया कि वह 2016 से लेकर अब तक 1 हजार से ज्यादा लोगों से 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं। पुलिस उनके अन्य अकाउंट के बारे में जानकारी कर रही है। जरूरतमंद लोगों के अकाउंट खुलाकर उसमें डलवाते थे रुपये जानकारी के अनुसार, पुलिस को जांच में एक श्याम सुंदर नाम का अकाउंट मिला था। जब पुलिस मथुरा के रहने वाले उस व्यक्ति के पते पर पहुंची तो वहां झोपड़ी थी। पीड़ित से जब पुलिस ने बात की तो उसने बताया कि कुछ समय पहले अजीत नाम का एक शख्स वहां आया था और खुद को बड़ा कारोबारी बताया था। उसने कहा था कि इनकम टैक्स से बचने के लिए उसे बैंक अकाउंट की जरूरत है। वह इसके बदले में कुछ रकम उसे दे देगा। वह उसके झांसे में आ गए और खाता खुलवा लिया। कुछ दिन बाद अचानक उसके अकाउंट में लाखों रुपये आए तो वह हैरान रह गया। इसके बाद उसने इस बारे में बैंक को लिखित में जानकारी दी थी।


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