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जन्मदिन के दिन ही गुरुवार को शहीद हुए सिपाही सुल्तान सिंह, आज उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में शातिर अपराधी विकास दुबे और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही सुल्तान सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात उनके पैतृक गांव लाया गया। झांसीके भोजला गांव के रहने वाले सिपाही सुल्तान सिंह शहीद हो गए थे। शहीद सिपाही को जन्मदिन के ही दिन शहादत मिली। जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

शहीद सुल्तान सिंह के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक निवास लाए जाने के उपरांत राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि देकर उनकी वीरता को नमन किया गया। इस दौरान पुलिस महानिरीक्षक सुभाष सिंह बघेल, जिलाधिकारी आंद्रा वामसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डी प्रदीप कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर राहुल श्रीवास्तव और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राहुल मिठास सहित पुलिस विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। इस बीच गांव वाले और रिश्तेदार भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

संघर्ष भरा था सुल्तान सिंह का जीवन
सुल्तान सिंह तीन भाई और एक बहन थे। बचपन में ही मां का निधन हो जाने के बाद वे मऊरानीपुर में अपने नाना के घर रहे। वही इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की इसके बाद बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। साल 2006 में उनका पुलिस विभाग में चयन हो गया। बचपन से ही उन्हें पुलिस भर्ती का शौक था।

सुल्तान सिंह के सर से बचपन में मां का साया उठ गया और बाद में छोटे भाई की मौत हो गई थी। अब सुल्तान सिंह की शहादत के बाद घर में बूढ़े पिता एक भाई और एक बहन बचे हैं। 2015 में सुल्तान सिंह की शादी कानपुर के रहने वाले एक सब इंस्पेक्टर की बेटी से हुई थी। उनकी 7 साल की एक बेटी भी है। पुलिस में चयन होने के बाद सुल्तान सिंह की पहली पोस्टिंग जनपद जालौन में और दूसरी पोस्टिंग ललितपुर में रही थी। इसके बाद कानपुर में उनकी तीसरी पोस्टिंग थी।



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झांसी के रहने वाले सिपाही सुल्तान सिंह का आज अंतिम संस्कार कर दिया गया। शुक्रवार देर रात उनका पार्थिव शरीर उनके गृह नगर पहुंचा था। वह गुरुवार को कानपुर में हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।


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